समुदाय की सेवा में समर्पित
हमारा "संगठन" प्रजापति समुदाय के कल्याण एवं विकास के लिए कार्य करता है
समुदाय के कल्याण के लिए हमारी विभिन्न सेवाएं
छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सहायता प्रदान करते हैं।
निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सहायता।
विवाह, त्योहार और सामुदायिक कार्यक्रमों में सहायता।
कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
समुदाय में एकता और भाईचारा बढ़ाने का कार्य।
श्री दक्ष प्रजापति समाज भारत
मा०बैजनाथ प्रजापति जी श्री दक्ष प्रजापति समाज भारत संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष है उन्होंने संगठन स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी प्रजापति समाज के विकास के लिए निरंतर ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं मा० बैजनाथ प्रजापति जी उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के निवासी हैं। पिता का नाम स्वर्गीय जवाहिर प्रजापति और माता का नाम स्वर्गीय कलावती देवी है। शिक्षा: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने हाईस्कूल की शिक्षा नव ज्योति इंटरमीडिएट कॉलेज, अदलहाट से पूरी की। इसके बाद इंटरमीडिएट की शिक्षा सरदार पटेल इण्टरमिडिएट कॉलेज, कोलना से प्राप्त की। उनकी स्नातक और स्नातकोत्तर की शिक्षा पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से पूर्ण हुई।
श्री बैजनाथ प्रजापति जी सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। WhatsApp Channel, Twitter, Instagram और Facebook के माध्यम से समुदाय के साथ जुड़े रहते हैं।
"समुदाय की एकता और विकास हमारा मुख्य उद्देश्य है।"
"समुदाय की एकता और विकास हमारा मुख्य उद्देश्य है"
"कुम्हार हूँ माटी मेरा कर्म अधिकार।
बिना ऐकता जीवन जीना है बेकार।।"
"ना संघर्ष, ना तकलिफे, क्या फिर जीने में।
तुफान भी थम जायेगा जब लक्ष्य होगा सीने में।।"
"है वही सुरमा इस जग में कोई चलता है पद चिन्हों पर।
कोई पद चिन्ह बनाता है"
"मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है।
हर पल जिंदगी का इम्तिहान होता है।
डरने वाले को कुछ नहीं मिलता।
लड़ने वालों के कदमों में जहान होता है।।"
"अगर बसन्त चाहिए तो
पतझड़ से गुजरना जरूरी है।
अगर आरक्षण चाहिए तो
सड़कों पर उतरना जरूरी है।"
सृष्टि के रचयिता और प्रजा के पालनकर्ता
दक्ष प्रजापति हिंदू धर्म के अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं और सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। वे प्रजा के पालनकर्ता और संरक्षक हैं।
प्रजापति समुदाय दक्ष प्रजापति के आदर्शों पर चलकर समाज सेवा, धर्म पालन और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करता है। हमारा समुदाय इन्हीं महान आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हमारे प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक
संस्थापक
जाति पाति तोड़ो मण्डल
श्री संतराम बी.ए. प्रजापति अपना पूरा जीवन समुदाय की सेवा और प्रजापति समाज के कल्याण के लिए समर्पित किया है। महात्मा संत राम बी.ए., एक समाज सुधारक जिन्होंने जाति व्यवस्था के विरुद्ध कार्य किया। यह कार्यक्रम 25 फ़रवरी को सुबह 10 बजे शिव मंदिर, बैकुंठपुर, मिर्ज़ापुर में आयोजित किया गया था। महात्मा संत राम बी.ए. का जन्म 14 फ़रवरी, 1887 को पंजाब के होशियारपुर ज़िले में एक छोटे से कुम्हार (प्रजापति) परिवार में हुआ था। उन्होंने 1909 में लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से बी.ए. की उपाधि प्राप्त की और फ़ारसी भाषा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए सम्मानित हुए। उन्होंने जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष हेतु 1922 में "जाति-पति तोड़क मंडल" (जाति तोड़ने वाला समाज) की स्थापना की। दस्तावेज़ में उल्लेख है कि स्वामी श्रद्धानंद, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस और अन्य प्रमुख हस्तियों ने इस समाज के सम्मेलनों में भाग लिया था। अनुवाद युग दृष्टा संत राम बी.ए. प्रजापति अमर रहें विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी महात्मा संत राम बी.ए. की 131वीं जयंती समारोह रविवार, 25 फरवरी को प्रातः 10 बजे शिव मंदिर, बैकुंठपुर, नारायणपुर, मिर्जापुर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। महात्मा संत राम बी.ए. का जन्म 14 फरवरी, 1887 को पंजाब के होशियारपुर जिले के पुरानी बसी नामक गाँव में एक छोटे से कुम्हार (प्रजापति) परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री रामदास गोहिल और माता श्रीमती मोहिनी देवी थीं। उनकी शिक्षा उर्दू और फ़ारसी में हुई थी। 1909 में, उन्होंने लाहौर के सरकारी कॉलेज से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की और फ़ारसी भाषा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। सामाजिक जीवन- छात्र जीवन में उन्हें जाति व्यवस्था से जुड़े दो कड़वे अनुभव हुए: जब उन्हें अंबाला के एक स्कूल में चौथी कक्षा में दाखिला मिला, तो रजिस्टर में उनकी जाति कुम्हार लिखी हुई थी। बी.ए. की पढ़ाई के दौरान, लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में उच्च जाति के छात्रों द्वारा उन्हें छात्रावास के मेस के बाहर खाना खाने के लिए मजबूर किया जाता था। 1899 में, संत राम बी.ए. ने श्रीमती गया देवी से विवाह किया। उनके एक पुत्र, देवन्नाट और एक पुत्री, गार्गी हुई। उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह जाति-भेद से मुक्त होकर किया, जिसके लिए उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। सामाजिक कार्य- महात्मा संत राम बी.ए. ने समाज में व्याप्त अनेक बुराइयों, विशेषकर जाति-व्यवस्था के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उनका कार्यक्षेत्र भी जाति-व्यवस्था को तोड़ने से संबंधित था। उनके मतानुसार, सभी सामाजिक बुराइयों की जड़ जाति का बंधन है। इसीलिए उन्होंने 1922 में भाई परमानंद की अध्यक्षता में "जाति-पति तोड़क मंडल" (जाति-भेद निवारण मंडल) की स्थापना की। स्वामी श्रद्धानंद, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस, पंडित मोतीलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान विद्वान, इतिहासकार और राजनेता समय-समय पर इस मंडल के सम्मेलनों में भाग लेते थे। इस मंडल ने सर्वप्रथम उर्दू में "जाति-पाति तोड़क" नामक मासिक पत्रिका प्रकाशित की और कुछ समय बाद इसका नाम बदलकर "क्रांति" कर दिया गया, जिसके प्रधान संपादक श्री संतराम बी.ए. थे। 31 मार्च, 1988 को 101 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। इस ऐतिहासिक महापुरुष के दुःखद निधन के कारण 'क्रांति' पत्रिका का भी समापन हो गया। आपसे अनुरोध है कि आप सभी बड़ी संख्या में इस समारोह में उपस्थित होकर महात्मा जी की 131वीं जयंती को सफल बनाएँ।
"समुदाय की एकता ही हमारी शक्ति है। शिक्षा, संस्कार और सेवा के माध्यम से हम अपने समाज को आगे बढ़ा सकते हैं।"
समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी
समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी
वर्षों से जंजीरों में जकड़ी भारत माता स्वबल अस्तित्व की लड़ाई हमारे नौजवान बुद्धजीवी गोरे अंग्रेजों से संघर्ष कर रहे थे हजारों हजार नौजवान देश के लिए शहीद हो गये। गरम दल एवं नरम दल दोनों ने मिलकर देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाईं। भारत माता के वीर सपूतों के संघर्ष से स्वतन्त्रता प्राप्त तो हो गया परन्तु अंग्रेजों ने इतने बड़े देश को संवारने चलाने के अनुभव का बहाना बना देश में कुछ और दिन प्रवास करने की मंशा संजोये थे परन्तु हमारे मनीषियों ने देश का संचालन हेतु आजाद भारत को एक ऐसा संविधान दिया जो विश्वस्तरीय है। प्रिय बन्धुओं आप यह जरूर जानते है कि स्वतन्त्र भारत के संविधान के निर्माण की जिम्मेदारी तत्कालिन राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में डॉ० भीमराव अम्बेडकर को दी गयी। जिसमें एक संविधान सभा बनाया गया। इतने बड़े संविधान को लिखने में हर वर्ग, हर समाज के कर्तव्य उनके सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं, भौगोलिक परिस्थितयों के अनुकूल वृहद भारत को एक करने के सपने को साकार करने के उद्देश्य से अद्वितीय संविधान लिखा गया। आपको यह जानकर अपार खुशी होगी कि पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे समाज के महामानव बुद्धिजीवी एवं महात्मा गांधी के सत्याग्रहों में सम्मिलित हो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कहलाने वाले डॉ० रतनप्पा भरमप्पा कुम्भार जो संविधान लिखने में डॉ० भीमराव अम्बेडकर से कम नहीं है। डॉ० रतनप्पा भरमप्पा कुम्भार ही एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होने संविधान के मूल प्रति पर डॉ० भीमराव अम्बेडकर के साथ हस्ताक्षर किया था। फिर भी ऐसे देश भक्त र पैद्यश्री और बंधारण बनाने वाले प्रजापति समाज के बहुमूल्य विभूति डॉ० रतनप्पा भरमप्पा कुम्भार को हम कैसे भूल गये। उन्हत्तर साल तक ऐसे विभूति को देश के पटल पर नहीं लाया जा सका। यह प्रजापति समाज की उपेक्षा किया गया। हमें समझना है कि जिस समाज का इतिहास नहीं होता वह धीरे-धीरे विलुप्त होता जाता है। आप अपने समाज के महापुरूषों को जाने एवं उनके रास्ते पर चलकर संघर्ष करते हुये राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते हुये इस चरितार्थ को पूरा करे कि मांगने से भीख मिलता है, अधिकार छीना जाता है। इसके लिये एकता एवं संघर्ष की आवश्यक्ता होती है। यह सोच पैदा करने वाले महापुरूष के जीवन को जाने बगैर समाज अधूरा-अधूरा रह गया। देशभक्त डॉ० रतनप्पा भरमप्पा कुम्भार का जन्म १५/०९/१९०९ को महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पास निमिशीर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन में शिक्षा गांव के विद्यालय में हुई थी। तत्पश्चात नागपुर के राजाराम कॉलेज से स्नातक की डिग्री १९३३ में हासिल की। युवा अवस्था में ही राजनैतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने से उनकि गणना अग्रणी कार्यकर्ताओं में होने लगी। ब्रिटीश काल में राजनैतिक, सामाजिक संगठन प्रजा-परिषद के बैनर तले आन्दोलनों का नेतृत्व किया। आजादी के बाद डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के अध्यक्षता में जो सभा गठित की गयी थी उसमें डॉ० रतनप्पा कुम्भार कों पिछड़ी जाति के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित किया गया। इन्होने सहकारिता आन्दोलन का नेतृत्व किया और कई सहकारी संस्थाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया जिसमें पंचगंगा सहकारी चीनी मील, जनता सहकारी बैंक, कोल्हापुर सहकारी शेतकारी विकारी सूत गिरानी एवं जनता सेन्ट्रल कोऑपरेटिव कन्ज्यूमर स्टोर प्रमुख है। कोल्हापुर जिले के कामगारों, मजदूरों एवं किसानों की खुशहाली के लिये जीवनभर संघर्षरत् रहे। सामाजिक सेवाओं का सम्मान करते हुये भारत सरकार ने १९८५ में पद्यश्री से सम्मानित किया। वह आजाद भारत के प्रथम लोक सभा के लिए १९५२ में निर्वाचित हुए महाराष्ट्र विधान सभा के सदस्य रहे तथा महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट स्तर के मंत्री रहे। नवासी वर्ष की आयु में डॉ० रतनप्पा कुम्भार २३ दिसम्बर १९९८ को हृदयागति रूक जाने से कोल्हापुर अस्पताल में स्वर्ग वासी हो गये। महास्वतन्त्रता सेनानी के शवयात्रा में तत्कालीन मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता एवं उनके विधायक शामिल हुये एवं राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार हुआ। मृत्यु के पश्चात महाराष्ट्र सरकार उनके सम्मान में ए०के० कॉलेज का नाम बदलकर डॉ० रतनप्पा कुम्भार कॉलेज ऑफ कॉमर्स रखा गया। समाज के ऐसे विभूति को याद करने का समय आ गया है अपने समाज के महापुरूष को हमें याद करने में गर्व महसूस हो रहा है आइये इनके कारनामों को जाने एवं संघर्ष की राह पर चलकर अपने को संगठित एवं संघर्षमय बनायें। हमें अपने आप को परखने एव भीतर की शक्ति को जगाने की जरूरत है।हम समाज को एक सूत्र में बांध कर उभर रहे तू-तू, मै-मै की परिभाषा छोड़कर हम एवं हमारे के सोच को त्याग कर आइये अपने लक्ष्य की ओर बढ़े। हमें गर्व हे कि पिछड़ा वर्ग का बेटा देश के संविधान पर हस्ताक्षर करने के बाद हम आप से दूर गुमनाम रखा गया। समय आ गया है कि इन्हे समाज में देश में प्रतिष्ठित किया जायें। यह समाज की नैतिक दायित्व हैं। सभी जिला के सम्मेलन में इस महापुरूष को याद उनके बताये रास्ते पर चल समाज के हक को दिलाने का पूरा प्रयास किया जाये। जनसंख्या के अनुपात में १० सांसद एवं विधान सभाओं में १० सदस्य होने चाहिये। इसे प्राप्त करने में हम सब की अहम भूमिका होनी चाहिये। अहम भूमिका के लिये महामानव को श्रद्धा सूमन अर्पित किया जा रहा है और प्रति वर्ष १५ सितम्बर को इनका जन्म दिवस मनाकर याद किया जाना अति आवश्यक है। देशभक्त डॉ० रतनप्पा कुम्भार पर १०० पेज की पुस्तक तैयार किया जा रहा है।
रत्नप्पा कुम्हार जी ने अपने समय में जाति-पाति की बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में समानता स्थापित करने के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनका योगदान प्रजापति समुदाय के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है।
"समाज में व्याप्त भेदभाव को मिटाकर ही हम एक मजबूत और एकजुट समुदाय का निर्माण कर सकते हैं। शिक्षा और एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।"
रत्नप्पा कुम्हार जी के आदर्श आज भी हमारे समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके द्वारा स्थापित मूल्य और सिद्धांत आज भी प्रजापति समाज का मार्गदर्शन करते हैं।
श्री दक्ष प्रजापति समाज भारत एक प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन है जो प्रजापति समुदाय के कल्याण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। हमारा समाज मीरजापुर, उत्तर प्रदेश में स्थित है और पूरे क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान करता है।
दक्ष प्रजापति हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता हैं, जो सृष्टि के रचयिता और प्रजा के पालनकर्ता माने जाते हैं। प्रजापति समुदाय इन्हीं के नाम पर अपनी पहचान रखता है और समाज सेवा में विश्वास करता है।
समुदाय की सेवा में समर्पित
हमारे सदस्यता कार्ड में दक्ष प्रजापति का पारंपरिक लोगो मौजूद है जो हमारी संस्कृति और मूल्यों को दर्शाता है।
हमसे जुड़ें और समुदाय का हिस्सा बनें
Village: BHUILI KHAS
Post: BHUILI KHAS
District: MIRZAPUR
State: UTTAR PRADESH
Country: INDIA
+91 94156 34624
WhatsApp उपलब्ध
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